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mahabharat 12.71.29: और राजा अपनी प्रजा का धर्मपूर्वक पालन करके एक दिन के पुण्य का फल दस हजार वर्षों तक स्वर्ग में रहकर भोगता है।   |   mahabharat अध्याय 12.71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.71.29 
यदह्ना कुरुते धर्मं प्रजा धर्मेण पालयन्।
दशवर्षसहस्राणि तस्य भुंक्ते फलं दिवि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
और राजा अपनी प्रजा का धर्मपूर्वक पालन करके एक दिन के पुण्य का फल दस हजार वर्षों तक स्वर्ग में रहकर भोगता है।
 
And the king enjoys the fruits of the good deeds of one day which he incurs by looking after his subjects righteously, by living in heaven for ten thousand years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)