Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.71.28: राजा अपनी प्रजा को भय से न बचाकर एक दिन में जो पाप करता है, उसका फल उसे एक हजार वर्ष तक भोगना पड़ता है॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 12.71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.71.28 
यदह्ना कुरुते पापमरक्षन् भयत: प्रजा:।
राजा वर्षसहस्रेण तस्यान्तमधिगच्छति॥ २८॥
 
 
अनुवाद
राजा अपनी प्रजा को भय से न बचाकर एक दिन में जो पाप करता है, उसका फल उसे एक हजार वर्ष तक भोगना पड़ता है॥ 28॥
 
The king has to suffer the consequences of the sin he commits in one day by not protecting his subjects from fear for a thousand years.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)