Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.71.17: जो प्रतिदिन दूध देने वाली गाय की सेवा करता है, वही दूध प्राप्त करता है; उसी प्रकार जो उचित साधनों से राष्ट्र की रक्षा करता है, वही उससे लाभ पाता है ॥17॥ | mahabharat अध्याय 12.71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो हि दोग्ध्रीमुपास्ते च स नित्यं विन्दते पय:।
एवं राष्ट्रमुपायेन भुञ्जानो लभते फलम्॥ १७॥
अनुवाद
जो प्रतिदिन दूध देने वाली गाय की सेवा करता है, वही दूध प्राप्त करता है; उसी प्रकार जो उचित साधनों से राष्ट्र की रक्षा करता है, वही उससे लाभ पाता है ॥17॥
Only he who serves the milk-giving cow daily gets the milk; similarly, only he who protects the nation with proper means benefits from it. ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥