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mahabharat 12.71.13: हे राजन! तुम लोभ करके अधर्म से धन की प्राप्ति मत करो, क्योंकि जो लोग शास्त्रविधि का पालन नहीं करते, उनके धर्म और अर्थ दोनों ही अस्थिर और अनिश्चित हैं॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.71.13 
मा स्माधर्मेण लोभेन लिप्सेथास्त्वं धनागमम्।
धर्मार्थावध्रुवौ तस्य यो न शास्त्रपरो भवेत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तुम लोभ करके अधर्म से धन की प्राप्ति मत करो, क्योंकि जो लोग शास्त्रविधि का पालन नहीं करते, उनके धर्म और अर्थ दोनों ही अस्थिर और अनिश्चित हैं॥13॥
 
O King! Do not be greedy and seek wealth through unrighteous means because those who do not follow the scriptures, their Dharma and Artha are both unstable and uncertain. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)