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mahabharat 12.71.11: धर्मानुसार प्रजा से कर वसूल करते हुए और नीति के अनुसार विधिपूर्वक राज्य का संचालन करते हुए राजा को आलस्य त्यागकर प्रजा के कल्याण की व्यवस्था करनी चाहिए ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 71: धर्मपूर्वक प्रजाका पालन ही राजाका महान् धर्म है, इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.71.11 
दापयित्वा करं धर्म्यं राष्ट्रं नीत्या यथाविधि।
तथैतं कल्पयेद् राजा योगक्षेममतन्द्रित:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
धर्मानुसार प्रजा से कर वसूल करते हुए और नीति के अनुसार विधिपूर्वक राज्य का संचालन करते हुए राजा को आलस्य त्यागकर प्रजा के कल्याण की व्यवस्था करनी चाहिए ॥11॥
 
While collecting taxes from the subjects in accordance with the Dharma and governing the state lawfully according to the policy, the King should abandon laziness and make arrangements for the welfare of the subjects. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)