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mahabharat 12.7.9: हाय! इस तुच्छ पृथ्वी के लिए हमने अजेय राजाओं को मार डाला और अब उन्हें त्यागकर, मित्र-सम्बन्धियों से रहित होकर दरिद्रों का जीवन व्यतीत कर रहे हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.7.9 
ते वयं पृथिवीहेतोरवध्यान् पृथिवीश्वरान्।
सम्परित्यज्य जीवामो हीनार्था हतबान्धवा:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हाय! इस तुच्छ पृथ्वी के लिए हमने अजेय राजाओं को मार डाला और अब उन्हें त्यागकर, मित्र-सम्बन्धियों से रहित होकर दरिद्रों का जीवन व्यतीत कर रहे हैं॥9॥
 
Alas! For this worthless earth we killed invincible kings and now, having abandoned them and being devoid of friends and relatives, we are leading a life of poverty-stricken people.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)