Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.7.8: जब हमने पृथ्वी पर विजय पाने की इच्छा रखने वाले अपने बन्धु-बान्धवों को मारा हुआ देखा है, तब इस समय हमें तीनों लोकों का राज्य देकर भी कोई प्रसन्न नहीं कर सकता ॥8॥ | mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब हमने पृथ्वी पर विजय पाने की इच्छा रखने वाले अपने बन्धु-बान्धवों को मारा हुआ देखा है, तब इस समय हमें तीनों लोकों का राज्य देकर भी कोई प्रसन्न नहीं कर सकता ॥8॥
When we have seen our relatives and friends who wanted to conquer the earth being killed, then no one can please us at this time even by giving us the kingdom of the three worlds. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥