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mahabharat 12.7.44: यह कहकर कुरुराज युधिष्ठिर चुप हो गए। तब कुंतीपुत्र अर्जुन ने भाषण देना आरम्भ किया।   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.7.44 
एतावदुक्त्वा वचनं कुरुराजो युधिष्ठिर:।
उपारमत् तत: पार्थ: कनीयानभ्यभाषत॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर कुरुराज युधिष्ठिर चुप हो गए। तब कुंतीपुत्र अर्जुन ने भाषण देना आरम्भ किया।
 
Having said this, the Kuru King Yudhishthira became silent. Then Kunti's youngest son Arjuna began to give a speech. 44.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि युधिष्ठिरपरिदेवनं नाम सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें युधिष्ठिरका खेदपूर्ण उद्‍गार नामक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)