श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  12.7.42-43h 
स परिग्रहमुत्सृज्य कृत्स्नं राज्यं सुखानि च॥ ४२॥
गमिष्यामि विनिर्मुक्तो विशोको निर्मम: क्वचित् ।
 
 
अनुवाद
अतः मैं सम्पूर्ण सम्पत्ति का त्याग करके सम्पूर्ण राज्य और उसके सुखों को त्याग दूँगा, बन्धन से मुक्त हो जाऊँगा, शोक और आसक्ति से ऊपर उठ जाऊँगा और किसी वन में चला जाऊँगा ॥42 1/2॥
 
Therefore, renouncing all possessions, I shall kick away the entire kingdom and its pleasures, be free from bondage, rise above grief and attachment and go to some forest. ॥ 42 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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