Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.7.41-42h: मैंने केवल संपत्ति (राज्य और धन का संग्रह) की इच्छा करके पाप संचित किए हैं, जो जन्म-मरण का मुख्य कारण है। श्रुतिका कहती है कि 'संपत्ति से केवल पाप ही प्राप्त होते हैं'॥41 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मया निसृष्टं पापं हि परिग्रहमभीप्सता॥ ४१॥
जन्मक्षयनिमित्तं च प्राप्तुं शक्यमिति श्रुति:।
अनुवाद
मैंने केवल संपत्ति (राज्य और धन का संग्रह) की इच्छा करके पाप संचित किए हैं, जो जन्म-मरण का मुख्य कारण है। श्रुतिका कहती है कि 'संपत्ति से केवल पाप ही प्राप्त होते हैं'॥41 1/2॥
I have only accumulated sins by desiring possessions (collection of kingdom and wealth), which is the main cause of birth and death. The Shrutika says that ‘only sins can be obtained by possessions’॥ 41 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥