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mahabharat 12.7.33: वह मूर्ख दुर्योधन, जो हमारे प्रति शत्रुता का प्रतीक था, पूर्णतया बद्ध हो गया। दुर्योधन के कारण ही हमारे कुल का पतन हुआ ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.7.33 
सोऽस्माकं वैरपुरुषो दुर्मति: प्रग्रहं गत:।
दुर्योधनकृते ह्येतत् कुलं नो विनिपातितम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वह मूर्ख दुर्योधन, जो हमारे प्रति शत्रुता का प्रतीक था, पूर्णतया बद्ध हो गया। दुर्योधन के कारण ही हमारे कुल का पतन हुआ ॥33॥
 
That foolish Duryodhana, the embodiment of enmity towards us, was completely bound. It was because of Duryodhana that our clan declined. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)