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mahabharat 12.7.29: अपने पतित, लोभी और कामी पुत्र को न वश में रखने के कारण उसे और उसके भाइयों को मरवाकर स्वयं ही अपने उज्ज्वल यश को भ्रष्ट कर लिया ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.7.29 
अनियम्याशुचिं लुब्धं पुत्रं कामवशानुगम्।
यशस: पतितो दीप्ताद् घातयित्वा सहोदरान्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
अपने पतित, लोभी और कामी पुत्र को न वश में रखने के कारण उसे और उसके भाइयों को मरवाकर स्वयं ही अपने उज्ज्वल यश को भ्रष्ट कर लिया ॥29॥
 
Due to not controlling his impure, greedy and lustful son, he himself got corrupted by his bright fame by getting him and his brothers killed. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)