श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.7.22 
वयमेवास्य लोकस्य विनाशे कारणं स्मृता:।
धृतराष्ट्रस्य पुत्रेषु तत् सर्वं प्रतिपत्स्यति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस जगत् के विनाश का कारण हम ही माने जाते हैं; परन्तु इसका सारा उत्तरदायित्व धृतराष्ट्र के पुत्रों पर पड़ेगा ॥22॥
 
We are considered to be the cause of the destruction of this world; but the entire responsibility for this will fall on the sons of Dhritarashtra. ॥22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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