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mahabharat 12.7.19: हे माता! जब इन राजाओं के माता-पिता ने इनके द्वारा अर्जित धन और रत्न आदि का भोग करने की आशा की, तब वे मारे गए॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.7.19 
यदैषामम्ब पितरौ जातकामावुभावपि।
संजातधनरत्नेषु तदैव निहता नृपा:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे माता! जब इन राजाओं के माता-पिता ने इनके द्वारा अर्जित धन और रत्न आदि का भोग करने की आशा की, तब वे मारे गए॥19॥
 
Mother! When the parents of these kings expected to enjoy the wealth and gems etc. earned by them, then they were killed. ॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)