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mahabharat 12.7.16-18: परन्तु उनका प्रयास सर्वथा व्यर्थ रहा, क्योंकि हमने उन सभी माताओं के युवा पुत्रों को मार डाला, जो शुद्ध स्वर्ण कुण्डलों से सुसज्जित थीं। उन्हें इस लोक के सुख भोगने का अवसर नहीं मिला और वे देवताओं तथा पितरों का ऋण चुकाए बिना ही यमलोक चले गए।   |   mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 16-18
 
 
श्लोक  12.7.16-18 
तासामयं समुद्योगो निर्वृत्त: केवलोऽफल:॥ १६॥
यदासां निहता: पुत्रा युवानो मृष्टकुण्डला:।
अभुक्त्वा पार्थिवान् भोगानृणान्यनपहाय च॥ १७॥
पितृभ्यो देवताभ्यश्च गता वैवस्वतक्षयम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु उनका प्रयास सर्वथा व्यर्थ रहा, क्योंकि हमने उन सभी माताओं के युवा पुत्रों को मार डाला, जो शुद्ध स्वर्ण कुण्डलों से सुसज्जित थीं। उन्हें इस लोक के सुख भोगने का अवसर नहीं मिला और वे देवताओं तथा पितरों का ऋण चुकाए बिना ही यमलोक चले गए।
 
But their endeavour was completely futile because we killed the young sons of all those mothers who were adorned with pure gold earrings. They did not get the opportunity to enjoy the pleasures of this earth and went to Yamaloka without paying off the debt of the gods and forefathers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)