श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.7.11 
न पृथिव्या सकलया न सुवर्णस्य राशिभि:।
न गवाश्वेन सर्वेण ते त्याज्या य इमे हता:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हमारे ये जो बंधु-बांधव मारे गए हैं, यदि हमारे पास सारी पृथ्वी, बहुत सा सोना, सब गायें और घोड़े भी होते, तो भी हमें इन्हें नहीं छोड़ना चाहिए था ॥11॥
 
These relatives of ours who have been killed, we should not have abandoned them even if we had the entire earth, lots of gold and all the cows and horses. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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