Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.7.1: वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर का मन शोक से व्याकुल हो गया। महारथी कर्ण का स्मरण करके वे दुःखी हो गए और शोक में डूब गए। 1॥ | mahabharat अध्याय 12.7: युधिष्ठिरका अर्जुनसे आन्तरिक खेद प्रकट करते हुए अपने लिये राज्य छोड़कर वनमें चले जानेका प्रस्ताव करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! धर्मात्मा राजा युधिष्ठिर का मन शोक से व्याकुल हो गया। महारथी कर्ण का स्मरण करके वे दुःखी हो गए और शोक में डूब गए। 1॥
Vaishampayanji says- Rajan! The mind of the virtuous king Yudhishthira was distraught with grief. Remembering the great warrior Karna, he became sad and drowned in grief. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥