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mahabharat 12.69.d7: शतवर्ग 1, पंचवर्ग 2, दस दोष 3 और आठ दोष 4 - जो राजा इन सभी पर विजय प्राप्त कर लेता है और त्रिवर्ग 5 और दस वर्ग 6 के ज्ञान से संपन्न होता है, उसे देवता भी नहीं हरा सकते।   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  12.69.d7 
षट् पञ्च च विनिर्जित्य दश चाष्टौ च भूपति:।
त्रिवर्गैर्दशभिर्युक्त: सुरैरपि न जीयते॥
 
 
अनुवाद
शतवर्ग 1, पंचवर्ग 2, दस दोष 3 और आठ दोष 4 - जो राजा इन सभी पर विजय प्राप्त कर लेता है और त्रिवर्ग 5 और दस वर्ग 6 के ज्ञान से संपन्न होता है, उसे देवता भी नहीं हरा सकते।
 
Shatvarga 1, Panchvarga 2, Ten Doshas 3 and Eight Doshas 4 - a king who has conquered all of these and is endowed with the knowledge of Trivarga 5 and Ten Varga 6, cannot be defeated even by the Gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)