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mahabharat 12.69.96: इस युग में स्त्रियाँ प्रायः विधवा हो जाती हैं, लोग क्रूर हो जाते हैं, मेघ कहीं-कहीं ही वर्षा करते हैं और धान की फसल कहीं-कहीं ही होती है ॥ 96॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  12.69.96 
विधवाश्च भवन्त्यत्र नृशंसा जायते प्रजा।
क्वचिद् वर्षति पर्जन्य: क्वचित् सस्यं प्ररोहति॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
इस युग में स्त्रियाँ प्रायः विधवा हो जाती हैं, लोग क्रूर हो जाते हैं, मेघ कहीं-कहीं ही वर्षा करते हैं और धान की फसल कहीं-कहीं ही होती है ॥ 96॥
 
In this age women often become widows, people become cruel, clouds pour rain only in some places and rice crops are grown only in some places.॥ 96॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)