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mahabharat 12.69.92: कलियुग में पाप और दुष्टता बहुत है; परन्तु धर्म का पालन कहीं भी नहीं दिखाई देता। सब जातियों के लोगों का मन अपने धर्म से विमुख हो गया है॥ 92॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  12.69.92 
कलावधर्मो भूयिष्ठं धर्मो भवति न क्वचित्।
सर्वेषामेव वर्णानां स्वधर्माच्च्यवते मन:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
कलियुग में पाप और दुष्टता बहुत है; परन्तु धर्म का पालन कहीं भी नहीं दिखाई देता। सब जातियों के लोगों का मन अपने धर्म से विमुख हो गया है॥ 92॥
 
In Kaliyug, there is a lot of sin and evil; but no observance of religion is seen anywhere. The mind of people belonging to all castes strays from their religion.॥ 92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)