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mahabharat 12.69.85: अन्न तो पृथ्वी पर बिना जोते या बोए ही उगते हैं; औषधियाँ तो स्वाभाविक रूप से उगती हैं; उनकी छाल, पत्ते, फल और जड़ सभी शक्तिशाली हैं ॥ 85॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  12.69.85 
अकृष्टपच्या पृथिवी भवन्त्योषधयस्तथा।
त्वक्पत्रफलमूलानि वीर्यवन्ति भवन्ति च॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
अन्न तो पृथ्वी पर बिना जोते या बोए ही उगते हैं; औषधियाँ तो स्वाभाविक रूप से उगती हैं; उनकी छाल, पत्ते, फल और जड़ सभी शक्तिशाली हैं ॥ 85॥
 
Food grains grow on the earth without ploughing or sowing; medicines grow naturally; their bark, leaves, fruits and roots are all powerful. ॥ 85॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)