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व्याधयो न भवन्त्यत्र नाल्पायुर्दृश्यते नर:।
विधवा न भवन्त्यत्र कृपणो न तु जायते॥ ८४॥
अनुवाद
उस समय संसार में कोई रोग नहीं होता, कोई भी मनुष्य अल्पायु नहीं होता, स्त्रियाँ विधवा नहीं होतीं तथा कोई भी मनुष्य दरिद्र या दुखी नहीं होता।
At that time, there are no diseases in this world, no human being is seen to have a short life, women do not become widows and no human being is poor or unhappy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥