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mahabharat 12.69.83: सभी ऋतुएँ सुखद और स्वास्थ्यवर्धक होती हैं। मनुष्यों की वाणी, रंग और मन स्वच्छ और प्रसन्न हो जाते हैं। 83॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  12.69.83 
ऋतवश्च सुखा: सर्वे भवन्त्युत निरामया:।
प्रसीदन्ति नराणां च स्वरवर्णमनांसि च॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
सभी ऋतुएँ सुखद और स्वास्थ्यवर्धक होती हैं। मनुष्यों की वाणी, रंग और मन स्वच्छ और प्रसन्न हो जाते हैं। 83॥
 
All seasons are pleasant and health enhancing. The voice, complexion and mind of humans become clean and happy. 83॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)