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mahabharat 12.69.76: यदि राजा दण्ड नीति का सर्वोत्तम ढंग से प्रयोग करता है तो वह चारों वर्णों को अपने-अपने धर्म का पालन करने के लिए बाध्य करता है तथा उन्हें अधर्म की ओर जाने से रोकता है।   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  12.69.76 
दण्डनीति: स्वधर्मेभ्यश्चातुर्वर्ण्यं नियच्छति।
प्रयुक्ता स्वामिना सम्यगधर्मेभ्यो नियच्छति॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
यदि राजा दण्ड नीति का सर्वोत्तम ढंग से प्रयोग करता है तो वह चारों वर्णों को अपने-अपने धर्म का पालन करने के लिए बाध्य करता है तथा उन्हें अधर्म की ओर जाने से रोकता है।
 
If the king uses the policy of punishment in the best manner, then it forces all the four castes to adhere to their respective dharmas and prevents them from going towards adharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)