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mahabharat 12.69.62: राजेन्द्र! जब कोई इच्छित कार्य सिद्ध हो जाए, तो उसमें सहायता करने वाले व्यक्तियों को बहुत से धन, उचित पुरस्कार तथा नाना प्रकार के मधुर एवं सान्त्वनापूर्ण वचनों से सम्मानित करना चाहिए ॥ 62॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  12.69.62 
कृते कर्मणि राजेन्द्र पूजयेद् धनसंचयै:।
दानेन च यथार्हेण सान्त्वेन विविधेन च॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! जब कोई इच्छित कार्य सिद्ध हो जाए, तो उसमें सहायता करने वाले व्यक्तियों को बहुत से धन, उचित पुरस्कार तथा नाना प्रकार के मधुर एवं सान्त्वनापूर्ण वचनों से सम्मानित करना चाहिए ॥ 62॥
 
Rajendra! When a desired task is accomplished, the people who helped in it should be felicitated with lots of money, appropriate rewards and various types of sweet and consoling words. ॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)