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mahabharat 12.69.44: नगर में वायु के आवागमन के लिए दीवारों में संकरे दरवाजे बनाए जाने चाहिए और बड़े दरवाजों की तरह उनकी भी हर प्रकार से सुरक्षा की जानी चाहिए ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.69.44 
संकटद्वारकाणि स्युरुच्छ्वासार्थं पुरस्य च।
तेषां च द्वारवद् गुप्ति: कार्या सर्वात्मना भवेत्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
नगर में वायु के आवागमन के लिए दीवारों में संकरे दरवाजे बनाए जाने चाहिए और बड़े दरवाजों की तरह उनकी भी हर प्रकार से सुरक्षा की जानी चाहिए ॥ 44॥
 
Narrow doors should be made in the walls to allow for air circulation in the city and they should be protected in every way like the big doors. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)