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mahabharat 12.69.41: राजा को चाहिए कि वह सभी छोटे-छोटे दुर्गों (जिनमें शत्रु छिप सकें) को उखाड़ दे और चैत्य (मंदिर-संबंधी) वृक्षों को छोड़कर शेष सभी छोटे वृक्षों को कटवा दे ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.69.41 
दुर्गाणां चाभितो राजा मूलच्छेदं प्रकारयेत्।
सर्वेषां क्षुद्रवृक्षाणां चैत्यवृक्षान् विवर्जयेत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह सभी छोटे-छोटे दुर्गों (जिनमें शत्रु छिप सकें) को उखाड़ दे और चैत्य (मंदिर-संबंधी) वृक्षों को छोड़कर शेष सभी छोटे वृक्षों को कटवा दे ॥ 41॥
 
The king should have all the small forts (in which enemies could hide) uprooted and get all the small trees cut down except the Chaitya (temple-related) trees. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)