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mahabharat 12.69.4: राजा को चाहिए कि पहले अपने मन को जीत ले, फिर शत्रुओं को जीतने का प्रयत्न करे। जो राजा मन को नहीं जीत सकता, वह शत्रुओं को कैसे जीत सकता है?॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.69.4 
आत्मा जेय: सदा राज्ञा ततो जेयाश्च शत्रव:।
अजितात्मा नरपतिर्विजयेत कथं रिपून्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि पहले अपने मन को जीत ले, फिर शत्रुओं को जीतने का प्रयत्न करे। जो राजा मन को नहीं जीत सकता, वह शत्रुओं को कैसे जीत सकता है?॥4॥
 
A king should first conquer his mind and then try to conquer his enemies. How can a king who has not conquered his mind conquer his enemies?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)