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mahabharat 12.69.38: शत्रु के खेतों में अन्न नष्ट करने के लिए उसे वहाँ के लोगों में फूट डालनी चाहिए अथवा अपनी ही सेना से सब कुछ नष्ट करवा देना चाहिए, जिससे शत्रु को खाद्य पदार्थों की कमी हो जाए ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.69.38 
क्षेत्रस्थेषु च सस्येषु शत्रोरुपजयेन्नरान्।
विनाशयेद् वा तत् सर्वं बलेनाथ स्वकेन वा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
शत्रु के खेतों में अन्न नष्ट करने के लिए उसे वहाँ के लोगों में फूट डालनी चाहिए अथवा अपनी ही सेना से सब कुछ नष्ट करवा देना चाहिए, जिससे शत्रु को खाद्य पदार्थों की कमी हो जाए ॥38॥
 
In order to destroy the grains in the enemy's fields, he should create divisions among the people there or get everything destroyed by his own army, so that the enemy faces a shortage of food items. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)