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mahabharat 12.69.23-24: जो बुद्धिमान राजा अपने राज्य का कल्याण चाहता है, उसे सदैव युद्ध से बचने का प्रयत्न करना चाहिए। हे मनुष्यों के स्वामी! बृहस्पतिजी ने कहा है कि राजा केवल इन तीन साधनों - साम, दान और भेद - से ही धन कमा सकता है। बुद्धिमान राजा को इन साधनों से अर्जित धन से ही संतुष्ट रहना चाहिए॥ 23-24॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  12.69.23-24 
वर्जनीयं सदा युद्धं राज्यकामेन धीमता।
उपायैस्त्रिभिरादानमर्थस्याह बृहस्पति:॥ २३॥
सान्त्वेन तु प्रदानेन भेदेन च नराधिप।
यदर्थं शक्नुयात् प्राप्तुं तेन तुष्येत पण्डित:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जो बुद्धिमान राजा अपने राज्य का कल्याण चाहता है, उसे सदैव युद्ध से बचने का प्रयत्न करना चाहिए। हे मनुष्यों के स्वामी! बृहस्पतिजी ने कहा है कि राजा केवल इन तीन साधनों - साम, दान और भेद - से ही धन कमा सकता है। बुद्धिमान राजा को इन साधनों से अर्जित धन से ही संतुष्ट रहना चाहिए॥ 23-24॥
 
A wise king who wants the welfare of his kingdom should always try to avoid war. O Lord of men! Brihaspatiji has said that the king can earn money only through these three means - Sama, Daan and Bhed. The wise king should be satisfied with the money that can be earned through these means.॥ 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)