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mahabharat 12.69.21: बल और पराक्रम से हीन राजा को भी अपने से अधिक शक्तिशाली राजा के अधीन नहीं होना चाहिए। उसे अपने शक्तिशाली शत्रु को गुप्त रूप से निर्बल करने का प्रयत्न करना चाहिए ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.69.21 
न च वश्यो भवेदस्य नृपो यश्चातिवीर्यवान्।
हीनश्च बलवीर्याभ्यां कर्षयंस्तत्परो वसेत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
बल और पराक्रम से हीन राजा को भी अपने से अधिक शक्तिशाली राजा के अधीन नहीं होना चाहिए। उसे अपने शक्तिशाली शत्रु को गुप्त रूप से निर्बल करने का प्रयत्न करना चाहिए ॥21॥
 
Even a king lacking in strength and valour should not submit to a king who is far more powerful than him. He should try to weaken his powerful enemy secretly. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)