Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.69.19-20: यदि शत्रु पर आक्रमण करना हो, तो पहले उसके बल का पता लगा लेना चाहिए। यदि वह मित्रहीन, सहायक और बंधु-बांधवों से रहित, दूसरों से युद्धरत, प्रमादी और दुर्बल दिखाई दे, तथा स्वयं का सैन्यबल प्रबल हो, तो युद्धकुशल, वीर और ऐश्वर्यवान राजा को उचित है कि वह अपनी सेना को कूच करने की आज्ञा दे। पहले अपनी राजधानी की रक्षा का प्रबन्ध कर लेना चाहिए, फिर शत्रु पर आक्रमण करना चाहिए।॥19-20॥ | mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यात्रायां यदि विज्ञातमनाक्रन्दमनन्तरम्।
व्यासक्तं च प्रमत्तं च दुर्बलं च विचक्षण:॥ १९॥
यात्रामाज्ञापयेद् वीर: कल्य: पुष्टबल: सुखी।
पूर्वं कृत्वा विधानं च यात्रायां नगरे तथा॥ २०॥
अनुवाद
यदि शत्रु पर आक्रमण करना हो, तो पहले उसके बल का पता लगा लेना चाहिए। यदि वह मित्रहीन, सहायक और बंधु-बांधवों से रहित, दूसरों से युद्धरत, प्रमादी और दुर्बल दिखाई दे, तथा स्वयं का सैन्यबल प्रबल हो, तो युद्धकुशल, वीर और ऐश्वर्यवान राजा को उचित है कि वह अपनी सेना को कूच करने की आज्ञा दे। पहले अपनी राजधानी की रक्षा का प्रबन्ध कर लेना चाहिए, फिर शत्रु पर आक्रमण करना चाहिए।॥19-20॥
If you want to attack the enemy, you should first find out about his strength. If he is friendless, without helpers and relatives, is engaged in a war with others, is negligent and appears weak, and your own military strength is strong, then it is appropriate for a war-skilled, brave and prosperous king to order his army to march. First you should make arrangements for the protection of your capital and then attack the enemy.॥19-20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥