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mahabharat 12.69.105: अतः कुरुनन्दन! तुम दण्डनीति का आश्रय लेकर धर्मपूर्वक प्रजा का पालन करो। यदि तुम नीतिपूर्वक आचरण करके प्रजा की रक्षा करोगे, तो तुम दुर्जय स्वर्ग को जीत लोगे। 105॥   |   mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  12.69.105 
तस्मात् कौरव्य धर्मेण प्रजा: पालय नीतिमान्।
एवं वृत्त: प्रजा रक्षन् स्वर्गं जेतासि दुर्जयम्॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
अतः कुरुनन्दन! तुम दण्डनीति का आश्रय लेकर धर्मपूर्वक प्रजा का पालन करो। यदि तुम नीतिपूर्वक आचरण करके प्रजा की रक्षा करोगे, तो तुम दुर्जय स्वर्ग को जीत लोगे। 105॥
 
So Kurunandan! You take recourse to the policy of punishment and follow the people religiously. If you protect your people by behaving ethically, then you will conquer the formidable heaven. 105॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि एकोनसप्ततितमोऽध्याय:॥ ६९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ११ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ११६ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)