Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.69.102: अतः बुद्धिमान क्षत्रिय राजा को चाहिए कि वह सदैव दण्ड नीति का ध्यान रखे, जो वस्तुएँ उसके पास नहीं हैं, उन्हें प्राप्त करने की इच्छा रखे तथा जो वस्तुएँ उसके पास हैं, उनकी रक्षा करे। इसमें कोई संदेह नहीं कि इससे उसकी प्रजा का कल्याण होता है। | mahabharat अध्याय 12.69: राजाके प्रधान कर्तव्योंका तथा दण्डनीतिके द्वारा युगोंके निर्माणका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दण्डनीतिं पुरस्कृत्य विजानन् क्षत्रिय: सदा।
अनवाप्तं च लिप्सेत लब्धं च परिपालयेत्॥ १०२॥
अनुवाद
अतः बुद्धिमान क्षत्रिय राजा को चाहिए कि वह सदैव दण्ड नीति का ध्यान रखे, जो वस्तुएँ उसके पास नहीं हैं, उन्हें प्राप्त करने की इच्छा रखे तथा जो वस्तुएँ उसके पास हैं, उनकी रक्षा करे। इसमें कोई संदेह नहीं कि इससे उसकी प्रजा का कल्याण होता है।
Therefore, a wise Kshatriya king should always keep the policy of punishment in mind and should desire to acquire the things that he does not have and protect the things that he has acquired. There is no doubt that the welfare of his subjects is achieved through this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥