Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.68.9: राजा ही धर्मानुसार शासन करके सम्पूर्ण जगत् की मर्यादा का उल्लंघन करने वाली और अनुचित भोगों में आसक्त तथा उन्हें प्राप्त करने में तत्पर रहने वाली प्रजा को प्रसन्न रखता है और स्वयं भी सुखी रहता है और अपनी महिमा से प्रकाशित होता है॥9॥ | mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा ह्येवाखिलं लोकं समुदीर्णं समुत्सुकम्।
प्रसादयति धर्मेण प्रसाद्य च विराजते॥ ९॥
अनुवाद
राजा ही धर्मानुसार शासन करके सम्पूर्ण जगत् की मर्यादा का उल्लंघन करने वाली और अनुचित भोगों में आसक्त तथा उन्हें प्राप्त करने में तत्पर रहने वाली प्रजा को प्रसन्न रखता है और स्वयं भी सुखी रहता है और अपनी महिमा से प्रकाशित होता है॥9॥
It is the king who keeps happy the people of the whole world who violate the dignity and are addicted to inappropriate pleasures and are eager to attain them, by ruling in accordance with religion and himself also remains happy and shines with his glory. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥