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mahabharat 12.68.7: जब कोसल के अत्यंत प्रतापी राजा ने यह प्रश्न पूछा, तो बुद्धिमान बृहस्पति ने शांतिपूर्वक राजा को सम्मान देने की आवश्यकता समझाते हुए प्रश्न का उत्तर देना शुरू किया।   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.68.7 
एवं पृष्टो महाप्राज्ञ: कौसल्येनामितौजसा।
राजसत्कारमव्यग्रं शशंसास्मै बृहस्पति:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जब कोसल के अत्यंत प्रतापी राजा ने यह प्रश्न पूछा, तो बुद्धिमान बृहस्पति ने शांतिपूर्वक राजा को सम्मान देने की आवश्यकता समझाते हुए प्रश्न का उत्तर देना शुरू किया।
 
When the extremely illustrious King of Kosal asked this question, the wise Brihaspati calmly started answering the question by explaining the need for honouring the king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)