Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.68.60: जो राजा इन्द्रियों को वश में करके, सत्यनिष्ठ होकर और उत्तम इच्छाशक्ति से इस पृथ्वी पर अच्छी तरह शासन करता है, वह महान यज्ञों का अनुष्ठान करके यशस्वी होता है और स्वर्ग में शाश्वत स्थान प्राप्त करता है ॥60॥   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  12.68.60 
नराधिपश्चाप्यनुशिष्य मेदिनीं
दमेन सत्येन च सौहृदेन।
महद्भिरिष्ट्वा क्रतुभिर्महायशा-
स्त्रिविष्टपे स्थानमुपैति शाश्वतम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
जो राजा इन्द्रियों को वश में करके, सत्यनिष्ठ होकर और उत्तम इच्छाशक्ति से इस पृथ्वी पर अच्छी तरह शासन करता है, वह महान यज्ञों का अनुष्ठान करके यशस्वी होता है और स्वर्ग में शाश्वत स्थान प्राप्त करता है ॥60॥
 
By controlling the senses, being truthful and having good will, a king who rules this earth well, becomes famous by performing great sacrifices and attains an eternal place in heaven. ॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)