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राजा प्रजानां हृदयं गरीयो
गति: प्रतिष्ठा सुखमुत्तमं च।
समाश्रिता लोकमिमं परं च
जयन्ति सम्यक् पुरुषा नरेन्द्र॥ ५९॥
अनुवाद
राजा ही प्रजा का महान हृदय, गति, प्रतिष्ठा और परम सुख है। नरेन्द्र! जो लोग राजा की शरण में जाते हैं, वे इस लोक और परलोक में पूर्ण विजय प्राप्त करते हैं। 59.
The king is the greater heart, speed, prestige and supreme happiness of the subjects. Narendra! People who take shelter of the king achieve complete victory in this world and the next. 59.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥