Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.68.58: राजा ही मनुष्य को निर्भय और बलवान बनाता है और राजा ही उसे दुर्बल बनाता है। राजा के क्रोध का शिकार मनुष्य कैसे सुखी रह सकता है? राजा अपनी शरण में आने वालों को सुखी बनाता है। 58. | mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा प्रगल्भं कुरुते मनुष्यं
राजा कृशं वै कुरुते मनुष्यम्।
राजाभिपन्नस्य कुत: सुखानि
राजाभ्युपेतं सुखिनं करोति॥ ५८॥
अनुवाद
राजा ही मनुष्य को निर्भय और बलवान बनाता है और राजा ही उसे दुर्बल बनाता है। राजा के क्रोध का शिकार मनुष्य कैसे सुखी रह सकता है? राजा अपनी शरण में आने वालों को सुखी बनाता है। 58.
The king makes a man impudent and strong and the king himself makes him weak. How can a man who is the victim of the king's anger be happy? The king makes those who take refuge in him happy. 58.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥