Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.68.57: इसी प्रकार राजा को चाहिए कि वह ऐसे वीर पुरुष को सेनापति बनाए जो आत्म-भक्ति से युक्त हो, युद्ध-विद्या में प्रशिक्षित हो, बुद्धिमान हो, धर्मात्मा हो, बुद्धिमान हो, शूरवीर हो और श्रेष्ठ कर्म करने वाला हो, जो अपनी सहायता के लिए दूसरों की सहायता न मांगे ॥57॥ | mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसी प्रकार राजा को चाहिए कि वह ऐसे वीर पुरुष को सेनापति बनाए जो आत्म-भक्ति से युक्त हो, युद्ध-विद्या में प्रशिक्षित हो, बुद्धिमान हो, धर्मात्मा हो, बुद्धिमान हो, शूरवीर हो और श्रेष्ठ कर्म करने वाला हो, जो अपनी सहायता के लिए दूसरों की सहायता न मांगे ॥57॥
In the same way, the king should make such a brave man full of strong devotion towards himself, trained in warfare, intelligent, religious, intelligent, valiant and doing noble deeds as the commander, who will not seek help from others for his help. 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥