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mahabharat 12.68.56: राजा को ऐसे मंत्री का आदर करना उचित है जो कृतज्ञ हो, विद्वान हो, बुद्धिमान हो, राजा के प्रति दृढ़ श्रद्धा रखता हो, अपनी इन्द्रियों को वश में रखता हो, सदैव धर्म में तत्पर रहता हो और बुद्धिमान मंत्री हो।   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.68.56 
कृतज्ञं प्राज्ञमक्षुद्रं दृढभक्तिं जितेन्द्रियम्।
धर्मनित्यं स्थितं नीत्यं मन्त्रिणं पूजयेन्नृप:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
राजा को ऐसे मंत्री का आदर करना उचित है जो कृतज्ञ हो, विद्वान हो, बुद्धिमान हो, राजा के प्रति दृढ़ श्रद्धा रखता हो, अपनी इन्द्रियों को वश में रखता हो, सदैव धर्म में तत्पर रहता हो और बुद्धिमान मंत्री हो।
 
It is appropriate for the king to respect a minister who is grateful, learned, of great mind, has firm devotion towards the king, has controlled his senses, is always devoted to religion and is a wise minister. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)