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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  12.68.54 
राजा भोजो विराट् सम्राट् क्षत्रियो भूपतिर्नृप:।
य एभि: स्तूयते शब्दै: कस्तं नार्चितुमर्हति॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
भोज, विराट, सम्राट, क्षत्रिय, भूपति और नृप इन शब्दों से जिस राजा की स्तुति की जाती है, उसकी पूजा कौन नहीं करेगा?
 
Who would not worship the king who is praised by the words Bhoja, Virat, Samrat, Kshatriya, Bhupati and Nrip? 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)