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mahabharat 12.68.53: जो लोग राजा का धन हड़प लेते हैं, वे उस नरक में गिरते हैं जो विशाल, भयानक, अस्थिर है और बहुत समय तक अचेत रहने वाला है ॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.68.53 
महान्तं नरकं घोरमप्रतिष्ठमचेतनम्।
पतन्ति चिररात्राय राजवित्तापहारिण:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जो लोग राजा का धन हड़प लेते हैं, वे उस नरक में गिरते हैं जो विशाल, भयानक, अस्थिर है और बहुत समय तक अचेत रहने वाला है ॥ 53॥
 
Those who usurp the king's wealth fall into a hell which is huge, terrible, unstable and makes one lose consciousness for a long time. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)