Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.68.52: जैसे हिरण किसी वध-यंत्र को छूते ही अपने प्राण खो देता है, वैसे ही राजा के धन को छू लेने वाला मनुष्य भी तुरन्त मर जाता है; इसलिए बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि इस लोक में राजा के धन की रक्षा उसी प्रकार करे, जैसे वह अपने धन की रक्षा करता है ॥ 52॥ | mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे हिरण किसी वध-यंत्र को छूते ही अपने प्राण खो देता है, वैसे ही राजा के धन को छू लेने वाला मनुष्य भी तुरन्त मर जाता है; इसलिए बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि इस लोक में राजा के धन की रक्षा उसी प्रकार करे, जैसे वह अपने धन की रक्षा करता है ॥ 52॥
Just as a deer loses its life the moment it touches a killing device, similarly a person who touches the wealth of the king is killed instantly; therefore a wise man should protect the wealth of the king in this world as he protects his own wealth. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥