Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.68.50: जब हवा से प्रज्वलित अग्नि किसी गांव या जंगल को जलाने लगती है, तो संभव है कि उसका कुछ भाग बिना जला रह जाए; परंतु जब राजा आक्रमण करता है, तो उसका कुछ भी नहीं बचता।   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  12.68.50 
कुर्यात् कृष्णगति: शेषं ज्वलितोऽनिलसारथि:।
न तु राजाभिपन्नस्य शेषं क्वचन विद्यते॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
जब हवा से प्रज्वलित अग्नि किसी गांव या जंगल को जलाने लगती है, तो संभव है कि उसका कुछ भाग बिना जला रह जाए; परंतु जब राजा आक्रमण करता है, तो उसका कुछ भी नहीं बचता।
 
When a fire ignited by the wind starts burning a village or a forest, it is possible that it leaves some part of it unburnt; but when the king attacks, nothing of his remains.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)