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श्लोक  12.68.48 
नास्यापवादे स्थातव्यं दक्षेणाक्लिष्टकर्मणा।
धर्म्यमाकांक्षता लोकमीश्वरस्यानसूयता॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति सभी कार्यों में निपुण है, बिना प्रयास के कार्य करने में समर्थ है, धर्मलोक में जाने की इच्छा रखता है तथा दोष-चिंतन से मुक्त है, उसे अपने देश के शासक की निन्दा नहीं करनी चाहिए।
 
A person who is adept in all tasks, capable of accomplishing tasks effortlessly, desires to go to the righteous worlds and is free from fault-finding thoughts should not indulge in criticising the ruler of his country.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)