Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.68.46-47: जब राजा धनरूपी जल की धाराओं से परोपकारी पुरुषों को तृप्त करता है और दुष्टों से नाना प्रकार के रत्न छीन लेता है, राज्य के किसी हितैषी को धन देता है और किसी (विद्रोही) का धन छीन लेता है, तब पृथ्वी की रक्षा करने वाला वह राजा इस लोक में कुबेर के समान माना जाता है ॥46-47॥ | mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदा तु धनधाराभिस्तर्पयत्युपकारिण:।
आच्छिनत्ति च रत्नानि विविधान्यपकारिणाम्॥ ४६॥
श्रियं ददाति कस्मैचित् कस्माच्चिदपकर्षति।
तदा वैश्रवणो राजा लोके भवति भूमिप:॥ ४७॥
अनुवाद
जब राजा धनरूपी जल की धाराओं से परोपकारी पुरुषों को तृप्त करता है और दुष्टों से नाना प्रकार के रत्न छीन लेता है, राज्य के किसी हितैषी को धन देता है और किसी (विद्रोही) का धन छीन लेता है, तब पृथ्वी की रक्षा करने वाला वह राजा इस लोक में कुबेर के समान माना जाता है ॥46-47॥
When the King satisfies the benevolent men with streams of water of wealth and snatches away the various kinds of gems from the wicked ones, gives money to some well-wisher of the state and snatches away the wealth of some (rebel), then that King, who protects the earth, is considered as Kubera in this world. ॥46-47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥