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mahabharat 12.68.44: जब राजा क्रोधित होकर सैकड़ों पतितों को उनके पुत्र, पौत्र और मन्त्रियों सहित मार डालता है, तब वह मृत्यु का स्वरूप हो जाता है ॥44॥   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.68.44 
अशुचींश्च यदा क्रुद्ध: क्षिणोति शतशो नरान्।
सपुत्रपौत्रान् सामात्यांस्तदा भवति सोऽन्तक:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जब राजा क्रोधित होकर सैकड़ों पतितों को उनके पुत्र, पौत्र और मन्त्रियों सहित मार डालता है, तब वह मृत्यु का स्वरूप हो जाता है ॥44॥
 
When the king becomes angry and kills hundreds of impure people along with their sons, grandsons and ministers, then he becomes the embodiment of death. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)