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mahabharat 12.68.43: जब राजा अपने गुप्तचरों की सहायता से अपनी समस्त प्रजा का पालन करता है और उनकी रक्षा करता हुआ विचरण करता है, तब वह सूर्य का रूप धारण करता है ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.68.43 
यदा पश्यति चारेण सर्वभूतानि भूमिप:।
क्षेमं च कृत्वा व्रजति तदा भवति भास्कर:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
जब राजा अपने गुप्तचरों की सहायता से अपनी समस्त प्रजा का पालन करता है और उनकी रक्षा करता हुआ विचरण करता है, तब वह सूर्य का रूप धारण करता है ॥ 43॥
 
When the king looks after all his subjects with the help of his spies and moves about protecting them all, then he takes the form of the Sun. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)