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mahabharat 12.68.41: राजा सदैव समयानुसार पाँच रूप धारण करता है। कभी अग्नि, कभी सूर्य, कभी मृत्यु, कभी कुबेर और कभी यमराज बन जाता है॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 12.68: वसुमना और बृहस्पतिके संवादमें राजाके न होनेसे प्रजाकी हानि और होनेसे लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.68.41 
कुरुते पञ्चरूपाणि कालयुक्तानि य: सदा।
भवत्यग्निस्तथाऽऽदित्यो मृत्युर्वैश्रवणो यम:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
राजा सदैव समयानुसार पाँच रूप धारण करता है। कभी अग्नि, कभी सूर्य, कभी मृत्यु, कभी कुबेर और कभी यमराज बन जाता है॥ 41॥
 
The king always assumes five forms according to the time. Sometimes he becomes fire, sometimes sun, sometimes death, sometimes Kubera and sometimes Yamaraja.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)